इतिहास हमेशा अपने आप को दुहराता है लेकिन बहुत कम लोगों की आंखे इस बदलाव को देख पाती है और बहुत कम लोग ही इतिहास के बीते पात्र को ढूढने की कोशिश भी करने का प्रयास करते है। भारतीय इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए कनिष्क का नाम अच्छी तरह याद होगा। लेकिन मैं यहां भारत सरकार के गृह मंत्रालय में अनुभाग अधिकारी के पद पर कार्यरत कार्यरत श्री जी कनिष्का की बात करने जा रहा हूं। हां बहुत सारे लोग कह सकते हैं कि कोई यह खास उपलब्धि नहीं है। हमारी समस्या यह रही है कि हम सिर्फ बहुत बड़े बड़े नामों के पीछे भागने की कोशिश करते है। हम एक बहुत बड़े बुद्ध , एक बडे गांधी, एक बडे कबीर को हलराते दुलराते है लेकिन एक छोटे छोटे नामों को गौण कर देते है। गांधी जयंती के अवसर पर लाल बहादुर शास्त्री महज एक खानापूर्ति रह जाते है। हम एक बहुत बडे मसीहा की प्रतिक्षा करते हैं शायद इसीलिए धरती पर समस्या है, रक्तपात है, भ्रष्टाचार है। हम छोटे छोटे कई लोगों को मिलाकर एक बड़ा नाम बनाने की कोशिश नहीं करते है।
हां तो बात हो रही थी कनिष्का की। इतिहास प्रसिद्ध कनिष्का धरती का कई मीलों क्षेत्र जीतना चाहता था जैसे कि अन्य राजाओं और बादशाहओं ने उस समय किया। इतिहास फिर दुहराता है लेकिन इस बार जिन्दगी के रंगमंच पर हैं जी कनिष्का पर इस समय उनके हाथो में तलवार नहीं है बल्कि है साइकिल। साइकिल के सहारे दुनिया जीतने की कोशिश । है न रोचक। “ यह रास्ता कहां जाता है मैं नहीं जानता पर यह मुझे इस पर चलने की प्रेरणा देता” को वर्षो से जेहन में दबाए हुए छोटे मोटे साहसिक कारनामों में लगे रहे। लेकिन आखिर 2004 में इम्तहान की हद हो गई तो अपने एक दोस्त के साथ दिल्ली से कन्याकुमारी की 3200 किमी की यात्रा पर अपनी साइकिल के साथ निकल पड़े। उन्होंने यह यात्रा 33 दिनों में पूरी की। एक आम आदमी खासकर दिल्ली जैसे शहरों के लोगों के लिए जो २ किमी की पैदल यात्रा में रिक्शा की बाट देखने लगते है । वे सोच सकते है उनकी इस जीवटता को । लेकिन अभी यह उनके लिए शुरुआत है। उनका अगला प्रोजक्ट “लेह से इटानगर” के पहाड़ी रास्तों पर साइकिल दौड़ाना। शायद बायरन की कविताओं का हिन्दी कवि बच्चन द्वारा अनुवाद उनके मस्तिष्क में उमड़ता घुमड़ता है।
सघन गहन मनमोहक बनतरु मुझको आज बुलाते हैं।
पर जो किए हैं वादे मैंने याद मुझे वो आते हैं
अभी कहां आराम वदा यह मौन निमंत्रण छलना है
अरे अभी तो मीलों मुझको मीलों मुझको चलना है।